श्री विश्राम सागर | Shree Vishram Sagar
- श्रेणी: Hindu Scriptures | हिंदू धर्मग्रंथ भक्ति/ bhakti वेद /ved
- लेखक: ज्वालाप्रसाद - मिश्र - pn jvalaprsad mishr
- पृष्ठ : 704
- साइज: 42 MB
- वर्ष: 1922
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दो शब्द :
इस पाठ में भक्ति और उसकी महत्ता पर विचार किया गया है। लेखक ने भक्तिपूर्ण जीवन को मानव जीवन का सर्वोत्तम उद्देश्य बताया है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि भक्ति के बिना मनुष्य संसार सागर से पार नहीं हो सकता। इसके लिए सत्संग को मुख्य उपाय माना गया है, जिससे विवेक और समझ विकसित होती है। लेखक ने भक्ति के महत्व को दर्शाने के लिए शास्त्रों और पुराणों में वर्णित भक्ति के विभिन्न उदाहरणों का उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि भक्तिपूर्ण जीवन जीने वाले व्यक्ति को परमेश्वर की निकटता प्राप्त होती है, और उसकी मन की शांति और ताप दूर हो जाते हैं। इसके अलावा, लेखक ने भक्तों की भिन्नताएँ और उनके अनुभवों को भी साझा किया है। उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि भक्ति का मार्ग कठिन होते हुए भी, इसके फलस्वरूप मानव जीवन की सार्थकता बढ़ती है। लेखक ने यह भी कहा है कि भक्तों के लिए हरि भक्ति का मार्ग ही सच्चा मार्ग है, और जो लोग इस मार्ग को अपनाते हैं, वे सच्चे भाग्यशाली होते हैं। अंत में, लेखक ने पाठकों से विनती की है कि वे इस भक्ति के मार्ग का अनुसरण करें और अपने जीवन में भक्ति को प्राथमिकता दें, ताकि वे परमात्मा के सान्निध्य का अनुभव कर सकें।
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