इतिहास चक्र | Itihas chakra

- श्रेणी: इतिहास / History
- लेखक: राम मनोहर लोहिया - Ram Manohar Lohia
- पृष्ठ : 94
- साइज: 3 MB
- वर्ष: 1955
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दो शब्द :
इस पाठ में लेखक ने इतिहास, मानवता और सभ्यता के विकास के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया है। उन्होंने बताया है कि कैसे इतिहास की समझ और अध्ययन से मानव जाति की समस्याओं का समाधान संभव है। लेखक ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक यात्रा के दौरान उन्होंने पश्चिमी लोगों के साथ भारत की गरीबी और बीमारियों पर चर्चा की। उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास का चक्र लगातार चलता रहता है, और यह संभव है कि भविष्य में भारत एक बार फिर से उन्नति की ओर बढ़े। वे यह मानते हैं कि मानव जाति की बुराइयों का समाधान केवल हिंसा से नहीं हो सकता, बल्कि संसाधनों की सफाई और सही दृष्टिकोण अपनाने से ही संभव है। लेखक ने इतिहास की व्याख्या के संदर्भ में मार्क्सवादी और हिगेलियन दृष्टिकोणों का उल्लेख किया और यह प्रश्न उठाया कि क्यों कुछ देशों में विकास हुआ जबकि भारत में ऐसा नहीं हो पाया। उन्होंने यह भी बताया कि मानव की परिभाषा और उसके उद्देश्य का ज्ञान आवश्यक है। मनुष्य अपने अस्तित्व के अर्थ को खोजने की कोशिश करता है, जो इतिहास के अध्ययन से भी जुड़ा है। लेखक ने यह निष्कर्ष निकाला कि मनुष्य को अपने इतिहास को समझकर अपने जीवन के उद्देश्यों को पहचानना चाहिए, ताकि वह अपने भविष्य को बेहतर बना सके। अंत में, लेखक ने यह विचार व्यक्त किया कि इतिहास में कोई निश्चित नियम नहीं हैं और कई बार घटनाएं संयोग से घटित होती हैं, लेकिन मानव जाति की चेतना और उसके संबंधों का ज्ञान आवश्यक है ताकि वह अपने विकास की दिशा को समझ सके।
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