आयुर्वेद का वैज्ञानिक इतिहास | Ayurved ka Vegyanik Itihas

By: आचार्य प्रियव्रत - Aacharya Priyavrat


दो शब्द :

इस पाठ में आयुर्वेद के वैज्ञानिक इतिहास और इसकी विभिन्न संहिताओं का उल्लेख किया गया है। आचार्य प्रियव्रत शर्मा ने आयुर्वेद की चिकित्सा पद्धतियों, उनके प्रकारों और विभिन्न औषधियों के गुणों का विस्तार से वर्णन किया है। आयुर्वेद में चिकित्सा के आठ प्रकार बताए गए हैं, जिनमें अगद और विपतन्त्र का भी समावेश किया गया है। पाठ में ऋतुविभाग और मानव जीवन के विभिन्न आयु वर्गों का भी वर्णन किया गया है। आयुर्वेद में चिकित्सा के लिए विभिन्न प्रकार की औषधियों का प्रयोग, जैसे तुलसी, मधुयष्टी, और अन्य औषधियों के गुणों का विवरण दिया गया है। साथ ही, विभिन्न रोगों और उनके उपचार विधियों का भी उल्लेख किया गया है। पाठ के अंत में विभिन्न आयुर्वेदिक ग्रंथों का संदर्भ दिया गया है, जिनमें चरक, सुश्रुत और वाग्भट का उल्लेख है। इन ग्रंथों के उद्धरणों के माध्यम से आयुर्वेद के विकास और ज्ञान के स्रोतों का पता चलता है। इसके अलावा, पाठ में आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों के ऐतिहासिक संदर्भ और उनकी महत्ता पर भी प्रकाश डाला गया है। इस प्रकार, यह पाठ आयुर्वेद के विज्ञान, इसके विभिन्न पहलुओं और इसके विकास के क्रम को समझने में सहायक है।


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