ध्यान शास्त्र | Dhyan Shastra

- श्रेणी: धारणा और ध्यान/ Concentration and Meditation योग / Yoga
- लेखक: आचार्य जुगल किशोर जैन 'मुख़्तार' - Acharya Jugal Kishor Jain 'Mukhtar'
- पृष्ठ : 374
- साइज: 19 MB
- वर्ष: 1963
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दो शब्द :
इस पाठ का सारांश इस प्रकार है: यह पाठ "तत्त्वानुशासन" नामक ध्यानशास्त्र की एक विवेचना है, जिसे ओनागसेनसूरि द्वारा लिखा गया है। इसे जुगलकिशोर मुख्तार ने संपादित और हिंदी में अनुवादित किया है। यह ग्रंथ ध्यान के माध्यम से आत्मा के विकास और मोक्ष के मार्ग को स्पष्ट करता है। इसके पहले भी इस ग्रंथ के कुछ संस्करण प्रकाशित हुए थे, लेकिन इस बार इसे एक शुद्ध और आधुनिक संपादन के साथ प्रस्तुत किया गया है। मुख्तार ने इस ग्रंथ का गहराई से अध्ययन किया और इसके विषयों पर विभिन्न विद्वानों के साथ विचार-विमर्श किया। उन्होंने ध्यानशास्त्र, योग और अन्य संबंधित ग्रंथों का भी अध्ययन किया। इस ग्रंथ में ध्यान के महत्व और उसके अभ्यास के माध्यम से आत्मा के विकास के लिए उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराई गई है। प्रस्तुत संस्करण में विस्तृत हिंदी भाष्य और प्रस्तावना शामिल है, जिससे पाठकों को सामग्री को समझने में मदद मिलेगी। ग्रंथ का उद्देश्य अध्यात्म प्रेमियों, विद्वानों और साधकों को आध्यात्मिक भोजन प्रदान करना है। इसे वीरसेवामन्दिर-ट्रस्ट द्वारा नि:शुल्क वितरण के लिए प्रकाशित किया गया है, जिससे इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ सकें। इस प्रकार, "तत्त्वानुशासन" ध्यान के सिद्धांतों और अभ्यासों का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जो अध्यात्मिक उन्नति के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करता है।
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