सूक्ति मंजरी | Sukti Manjari

By: बलदेव उपाध्याय - Baldev upadhayay
सूक्ति मंजरी  | Sukti Manjari by


दो शब्द :

यह पाठ संस्कृत भाषा के सुभाषितों का संक्षिप्त संग्रह है, जिसमें विभिन्न संस्कृत ग्रंथों और कवियों का उल्लेख किया गया है। इसमें विभिन्न सूक्तियों और उनके रचयिताओं के बारे में जानकारी दी गई है, जो कि प्राचीन संस्कृत साहित्य की समृद्धि को दर्शाती है। पाठ में बताया गया है कि संस्कृत साहित्य के कई महत्वपूर्ण ग्रंथ जैसे 'कवीन्द्रवचन', 'सदुक्ति', और 'सूक्तिमुक्तापल्‍ली' की रचनाएँ किस काल में हुईं और उनके रचयिता कौन थे। इन ग्रंथों के माध्यम से संस्कृत की कविता और उसके सौंदर्य को प्रस्तुत किया गया है। संस्कृत की भाषा की मिठास और उसकी विशेषताएँ भी इस पाठ में वर्णित की गई हैं। यह पाठ यह दर्शाता है कि संस्कृत साहित्य में विभिन्न प्रकार की सूक्तियाँ, कविताएँ और रचनाएँ समय-समय पर होती रही हैं, जो कि संस्कृत की समृद्धि का प्रतीक हैं। अंत में, इस पाठ में विभिन्न कवियों और उनकी रचनाओं का उल्लेख करते हुए यह बताया गया है कि कैसे ये रचनाएँ न केवल साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि वे भारतीय संस्कृति और ज्ञान की गहराई को भी दर्शाती हैं।


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