राग संगीत की उत्पत्ति एवं विकास का विश्लेषणात्मक अध्ययन | Rag Sangeet Ki Utpatti Awam Vikas Ka Vishleshanatmak Adhyayan

- श्रेणी: संगीत / Music साहित्य / Literature
- लेखक: निशा-श्रीवास्तव - Nisha-Srivastav
- पृष्ठ : 313
- साइज: 13 MB
- वर्ष: 1998
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दो शब्द :
यह शोध प्रबंध "राग संगीत की उत्पत्ति एवं विकास का विश्लेषणात्मक अध्ययन" कुमारी निशा श्रीवास्तव द्वारा प्रस्तुत किया गया है, जिसमें राग संगीत के विभिन्न पहलुओं का विस्तृत विवेचन किया गया है। इस शोध का मूल उद्देश्य राग संगीत के अर्थ, उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, और उसके विकास की प्रक्रिया को समझना है। शोध में राग की उत्पत्ति के विभिन्न दृष्टिकोणों का विश्लेषण किया गया है और इसके विकास को प्राचीन, मध्य और आधुनिक काल के संदर्भ में समझाने का प्रयास किया गया है। इसमें राग के आवश्यक तत्वों, राग रचना के आधारभूत सिद्धांतों और राग वर्गीकरण पर भी चर्चा की गई है। कुमारी निशा ने राग शब्द की व्याख्या और उसके विभिन्न अर्थों की पड़ताल की है, साथ ही प्राचीन ग्रंथों में रागों के उल्लेख और उनके लक्षणों की भी जानकारी दी है। शोध में यह स्पष्ट किया गया है कि राग संगीत का मुख्य उद्देश्य भावों को स्वर के माध्यम से व्यक्त करना है। इस प्रबंध में रागों की सांगीतिक विशेषताओं, उनके समय, और विभिन्न सांस्कृतिक संदर्भों में उनके महत्व का भी अध्ययन किया गया है। इसके अलावा, भारतीय चित्रकला और नृत्य में रागों की अभिव्यक्ति पर भी चर्चा की गई है। कुमारी निशा श्रीवास्तव ने इस शोध के माध्यम से राग संगीत की मौलिकता और उसकी ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने का प्रयास किया है, और उन्होंने अपने शोध कार्य में कई विद्वानों के मतों का भी उल्लेख किया है। अंत में, उन्होंने अपने मार्गदर्शक डॉ. गीता बनर्जी और अपने परिवार का आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने इस कार्य में उनका समर्थन किया।
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