भारत की एकता का निर्माण- (२७ भाषण) | Bharat ki Ekta ka Nirman - (27 Bhashan )

- श्रेणी: Speech and Updesh | भाषण और उपदेश भारत / India
- लेखक: वल्लभभाई पटेल - Vallabhbhai Patel
- पृष्ठ : 387
- साइज: 42 MB
- वर्ष: 1954
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दो शब्द :
यह पाठ सरदार वल्लभभाई पटेल की भूमिका और योगदान का वर्णन करता है, विशेष रूप से भारत की एकता के निर्माण में उनके प्रयासों को उजागर करता है। 15 अगस्त 1947 को भारत की स्वतंत्रता के समय, देश में 9 प्रांतों के अलावा 584 रियासतें थीं। इनमें से अधिकांश रियासतें छोटी थीं और एक स्वतंत्र राज्य के रूप में अस्तित्व में नहीं थीं। स्वतंत्रता के बाद, सरदार पटेल को इन रियासतों का एकीकरण करने का कार्य सौंपा गया। उन्होंने केवल दो वर्षों में सभी रियासतों को भारत के आंतरिक भागों में शामिल कर दिया और भारतीय लोकतंत्र की नींव रखी। पाठ में यह भी बताया गया है कि कैसे 584 रियासतों का क्षेत्रफल लगभग 5,88,000 वर्ग मील था और इनकी जनसंख्या 10 करोड़ के लगभग थी। पटेल की मेहनत के फलस्वरूप, यह रियासतें भारत के अन्य राज्यों के समान बन गईं, जिससे पूरे देश में प्रजातंत्र स्थापित हुआ। 1952 में हुए पहले आम चुनाव में सभी नागरिकों को समान मताधिकार प्राप्त हुआ। पटेल के भाषणों का इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण स्थान है, जो स्वतंत्रता के पहले 26 वर्षों की भारतीय समस्याओं पर प्रकाश डालते हैं। यह भाषण भारतीय जनता के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करेंगे और उन्हें इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त होगा। पाठ में उनके नेतृत्व और दृष्टिकोण की सराहना की गई है, जो कि भारतीय एकता के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक थे। इसके अलावा, पाठ में महिलाओं के प्रति अत्याचार और उनकी स्थिति पर भी चर्चा की गई है, जिसमें अपहृत नारियों की दुर्दशा का उल्लेख है। पटेल ने समाज से अपील की है कि वे इन पीड़ित महिलाओं की सहायता करें और उनकी स्थिति को सुधारने के लिए सामूहिक प्रयास करें। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार और जनता का सहयोग इस कार्य में आवश्यक है। अंत में, पाठ में भारतीय स्वतंत्रता के ऐतिहासिक क्षण का उल्लेख है, जिसमें पटेल ने देशवासियों को एकजुट होने की प्रेरणा दी और भारतीय संस्कृति और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझाने का प्रयास किया।
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