दुष्यंत कुमार रचनावली -४ | Dhusyant Kumar Rachnavali -4

- श्रेणी: जीवनी / Biography निबंध / Essay साहित्य / Literature
- लेखक: विजय बहादुर सिंह - Vijay Bahadur Singh
- पृष्ठ : 482
- साइज: 35 MB
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दो शब्द :
दुष्यन्त कुमार की रचनावली का चौथा खंड गद्य की विभिन्न विधाओं से भरा हुआ है, जिसमें संस्मरण, व्यक्तिचित्र, साक्षात्कार, निबंध, आलोचना, और रूपक शामिल हैं। यह खंड उनकी गद्य प्रतिभा को उजागर करता है और पाठकों को उनकी बहुमुखी लेखन शैली से परिचित कराता है। दुष्यन्त ने गद्य लेखन में न केवल साहित्यिक मूल्य प्रस्तुत किए, बल्कि अपनी रचनाओं में मौज-मस्ती और जीवन के रंगों को भी समेटा है। उनकी लेखनी में गहराई और नवीनता की झलक मिलती है, जो पाठकों को एक नए अनुभव की ओर ले जाती है। आकाशवाणी में उनके द्वारा रचित रूपक, जैसे 'अबूझमाड़', ने भी समीक्षकों और श्रोताओं से सराहना प्राप्त की। दुष्यन्त ने अनौपचारिक और सहज शैली में साक्षात्कारों को प्रस्तुत किया, जो उनके समय की जागरूकता और सामाजिक-राष्ट्रीय दृष्टिकोण को दर्शाते हैं। विभिन्न व्यक्तियों के व्यक्तिचित्रों के माध्यम से उन्होंने मानवीय स्वभाव की बारीकियों को बखूबी प्रस्तुत किया है। उनके राजनीतिक लेखन में भी उन्होंने बेलौस टिप्पणियाँ की हैं, जो उन्हें एक सशक्त विचारक के रूप में स्थापित करती हैं। दुष्यन्त की रचनाएँ न केवल गंभीर हैं, बल्कि उनमें हास्य और जीवन की हल्की-फुल्की बातें भी शामिल हैं, जो उनके लेखन को जीवंत बनाती हैं। उनकी रचनावली में जीवन के विभिन्न पहलुओं की छवि देखने को मिलती है, जिसमें गंभीरता, प्रसन्नता, पीड़ा, और बेफिक्री का अद्भुत संतुलन है। दुष्यन्त कुमार का लेखन एक समृद्ध और विविधतापूर्ण दुनिया को प्रस्तुत करता है, जो पाठकों को उनकी गहराई और जीवंतता के साथ जोड़ता है।
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