श्री विष्णु सहस्त्रनाम चिंतनिका | Shri Vishnu Sahastranam Chintanika

- श्रेणी: Hindu Scriptures | हिंदू धर्मग्रंथ धार्मिक / Religious पौराणिक / Mythological
- लेखक: कुंदर-दिवाण - Kundar-Diwann
- पृष्ठ : 642
- साइज: 120 MB
- वर्ष: 1998
-
-
Share Now:
दो शब्द :
“श्री विष्णुसहम्ननाम” एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है, जिसे समर्थ रामदास ने प्रस्तुत किया है। यह स्तोत्र हिंदू धर्म में दुरित नाशक शस्त्र के रूप में माना जाता है। इसमें नामस्मरण का महत्व वर्णित है, जो भक्तियों में एक प्रमुख भाव है। भीष्म ने महाभारत के अंत में इसे प्रस्तुत किया और इसके पाठ के द्वारा उन्होंने अपने देह का त्याग किया। इस स्तोत्र में केवल नामों की सूची नहीं है, बल्कि यह धर्मज्ञान और आध्यात्मिकता का संग्रह है। श्री कुंदर दिवाण ने इस स्तोत्र पर विस्तृत और गहन भाष्य लिखा है, जिसमें उन्होंने इसकी व्याख्या को आज की पीढ़ी के लिए स्पष्ट किया है। उनका यह कार्य महत्वपूर्ण है क्योंकि यह धार्मिक ज्ञान को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करता है। कुंदर दिवाण ने 107 श्लोकों पर आधारित भाष्य में अन्य स्तोत्रों की तुलना भी की है और विष्णु के नामों का वर्गीकरण किया है। उन्होंने यह भी बताया है कि वेदों में मंत्रों का अधिकार केवल त्रैवर्णिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सभी के लिए उपलब्ध है। कुंदर दिवाण की विद्धत्ता और उनके अध्ययन के परिणामस्वरूप, यह ग्रंथ सभी स्तर के अध्यात्मिक जिज्ञासुओं के लिए उपयोगी साबित होगा। इस ग्रंथ की प्रस्तावना में उल्लेख किया गया है कि महात्मा गांधी और अन्य महान विभूतियों के आशीर्वाद से यह कार्य किया गया है। कुंदर दिवाण की यह प्रस्तुति न केवल धार्मिक ज्ञान का प्रसार करती है, बल्कि यह एक अमृत के रूप में मानवता के जीवन को समृद्ध करने का कार्य करती है। इस प्रकार, “श्री विष्णुसहम्ननाम” का महत्व न केवल धार्मिक है, बल्कि यह आध्यात्मिक ज्ञान की एक गहनता को भी दर्शाता है, जिसे समझना और आत्मसात करना आज के युग के लिए अत्यंत आवश्यक है।
Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.