दो शब्द :

इस पाठ में तारा देवी की महिमा और उनके मंत्रों के प्रभाव का वर्णन किया गया है। तारा देवी को साधक द्वारा उपासना करने पर सिद्धियों की प्राप्ति होती है। पाठ में बताया गया है कि यदि साधक तारा के कुलाचार का पालन नहीं करता है, तो उसे सिद्धि नहीं मिलती और उसका मार्ग भी कठिन होता है। तारा मंत्र का श्रवण करने से साधक के पाप समाप्त हो जाते हैं, भले ही वह महापातक क्यों न हो। पाठ में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कुलाचार का पालन न करने वाले साधकों को न तो सिद्धि मिलती है और न ही मुक्ति। साधक को तारा की उपासना नियमित रूप से करनी चाहिए और उन्हें अपनी कुलदेवता की पूजा करनी चाहिए। यदि कोई साधक अपनी पत्नी को चक्रसिद्धि में नहीं देता है, तो वह साधक अपनी सिद्धियों को खो देता है। पाठ में तारा देवी के विभिन्न मंत्रों और उनके प्रभावों का उल्लेख किया गया है। यह भी कहा गया है कि तारा की उपासना करने से साधक सभी पापों से मुक्त हो जाता है। अंत में, तारा देवी के मंत्रों का गुप्त और शक्तिशाली होने का उल्लेख किया गया है। पाठ में तारा देवी की उपासना के महत्व को अत्यधिक महत्व दिया गया है और बताया गया है कि साधक को निरंतर साधना करनी चाहिए।


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