हिंदी साहित्य का उद्भव और विकास | Hindi Sahitya ka Udbhav aur Vikas

- श्रेणी: साहित्य / Literature हिंदी / Hindi
- लेखक: - रामबहोरी शुक्ल - Rambahori Shukl
- पृष्ठ : 580
- साइज: 83 MB
- वर्ष: 1956
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दो शब्द :
इस पाठ में हिन्दी साहित्य के उद्भव और विकास का विस्तृत वर्णन किया गया है। लेखक रामबहोरी शुक्ल और भगोरथ मिश्र ने यह स्पष्ट किया है कि मानव का चिंतन उसके सामाजिक और प्राकृतिक परिवेश से प्रभावित होता है। यह चिंतन जब वाणी में प्रकट होता है, तो उसमें धरती और आकाश दोनों की बातें समाहित होती हैं। साहित्य केवल स्वान्तः सुखाय नहीं होता, बल्कि यह दूसरों को अपने विचारों से प्रभावित करने का भी माध्यम है। लेखक ने यह भी बताया है कि साहित्य का विकास विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, और राजनीतिक परिस्थितियों से प्रभावित होता है। उन्होंने हिन्दी साहित्य के इतिहास में विभिन्न रचनाकारों और युगों का उल्लेख किया है, और यह बताया है कि कैसे समय के साथ साहित्य की धाराएँ और शैलियाँ विकसित हुई हैं। पाठ में भारत की भाषाओं की विविधता को भी दर्शाया गया है। लेखक ने बताया है कि भारत में अनेक भाषाएँ और बोलियाँ प्रचलित हैं, जो एक-दूसरे के साथ परस्पर प्रभावित होती हैं। उन्होंने भाषाओं के वर्गीकरण और उनके विकास का भी उल्लेख किया है। इस प्रकार, यह पाठ हिन्दी साहित्य के विकास के विभिन्न पहलुओं को एकत्रित करता है, जिसमें साहित्य की उत्पत्ति, उसका सामाजिक संदर्भ, और भाषाओं की विविधता का समावेश है। लेखक ने यह भी स्वीकार किया है कि वे इस विषय पर और भी शोध करना चाहते हैं और इस पुस्तक के माध्यम से अधिकतम जानकारी प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।
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