पर्व | Parv by


दो शब्द :

यह पाठ कन्नड़ में लिखे गए महाभारत पर आधारित उपन्यास 'पव्‍ं' की रचना की पृष्ठभूमि और लेखक के अनुभवों का विवरण प्रस्तुत करता है। लेखक ने महाभारत की कथा के वास्तविकता पर विचार करते हुए 1966 में डॉ. नारायणप्पा के साथ चर्चा की, जिसके बाद उन्होंने इसे उपन्यास का रूप देने का निर्णय लिया। 1970 के दशक में हिमालय की यात्रा के दौरान उन्होंने महाभारत के पात्रों और घटनाओं के बारे में गहराई से सोचा और अध्ययन किया। लेखक ने विभिन्न स्थानों का दौरा किया, जहां महाभारत की घटनाएँ घटी थीं, और अपने अनुभवों को आधार बनाकर उपन्यास लिखा। उन्होंने स्थानीय इतिहासकारों और विशेषज्ञों से भी जानकारी प्राप्त की। उपन्यास की रचना 1975 से 1976 के बीच हुई, जिसमें उन्होंने अपने अनुभवों और विचारों को शामिल किया। लेखक ने महाभारत के पात्रों के मनोविज्ञान और मानव संबंधों का गहन अध्ययन किया और इसे अपने लेखन में व्यक्त किया। उन्होंने यह भी बताया कि उपन्यास में ऐतिहासिक तथ्यों के अलावा मानव अनुभवों को महत्व दिया गया है। लेखक ने यह स्पष्ट किया कि उनका उपन्यास एक साहित्यिक कृति है जो मानवीय अनुभवों का विवेचन करती है। उन्होंने हिंदी पाठकों से अनुरोध किया कि वे इस उपन्यास को एक साहित्यिक दृष्टि से समझें और इसके अनुभवों को अपने जीवन के अर्थों की खोज में शामिल करें। पाठ के अंत में लेखक ने अपने अनुवादक और प्रकाशक का आभार व्यक्त किया।


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