वंश भास्कर (महाचम्पू) | Vansh Bhaskar ( Mahachampu)

By: चन्द्र प्रकाश देवल - Chandra Prakash Deval
वंश भास्कर (महाचम्पू) | Vansh Bhaskar ( Mahachampu) by


दो शब्द :

"वंश भास्कर" एक महाकाव्य है जिसे सूर्यमल्ल मीसण ने लिखा है। यह ग्रंथ राजपूत इतिहास, विशेषकर हाड़ा वंश के इतिहास को वर्णित करता है। इसमें विभिन्न मयूखों (अध्यायों) के माध्यम से हाड़ा वंश के राजाओं की कथाएँ, उनके युद्ध, विवाह, साम्राज्य विस्तार और आपसी संघर्षों का विवरण दिया गया है। पहले मयूख में हाड़ा राजा देवसिंह का समरसिंह को राज्य का आधा हिस्सा देकर देहत्याग करने का वर्णन है। इसके बाद हाड़ा देवसिंह के बारह पुत्रों का उल्लेख है, साथ ही बंबावदा के राजा हरराज के छोटे भाई से हाड़ा वंश में तीसरे भेद का प्रचलन शुरू होने की बात की गई है। दूसरे मयूख में अलाउद्दीन के चित्तौड़गढ़ पर आक्रमण और युद्ध का विवरण है, जिसमें राणा लक्ष्मणसिंह सहित कई हाड़ा राजाओं का बलिदान होता है। तीसरे मयूख में मांडलगढ़ के युद्ध और हाड़ा ह॒ख्न का बंबावदा पर अधिकार करने की कहानी है। आगे चलकर, हाड़ा राजा नरपाल और उनके पुत्र हाड़ा हम्मीर की कहानियाँ आती हैं। विभिन्न मयूखों में संघर्षों, विवाहों, और साम्राज्य विस्तार की घटनाएँ निरंतर चलती रहती हैं। राजा सुभांडदेव के समय में हाड़ा वंश के भीतर आंतरिक संघर्ष और बाहरी आक्रमणों का विवरण मिलता है। कई मयूखों में युद्ध की रणनीतियों, साम्राज्य के विस्तार, और राजनैतिक गठजोड़ का उल्लेख भी किया गया है। अंततः, यह ग्रंथ हाड़ा वंश के गौरवमयी इतिहास को उजागर करता है और राजपूत संस्कृति की वीरता एवं समर्पण को दर्शाता है।


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