भारतीय वास्तु शास्त्र | Bhartiya Vastu Shastra

By: अज्ञात - Unknown
भारतीय वास्तु शास्त्र  | Bhartiya Vastu Shastra by


दो शब्द :

यह पाठ भारतीय वास्तु-शास्त्र और उसके विभिन्न पहलुओं पर केंद्रित है। लेखक ने अपनी कृतियों के माध्यम से वास्तु-शास्त्र की महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है, जिसमें प्रासाद वास्तु, प्रतिमा-विज्ञान, चित्र लक्षण, और विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भों को शामिल किया गया है। भारतीय वास्तु-शास्त्र का मुख्य उद्देश्य भवनों और संरचनाओं के निर्माण में धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक तत्वों का समावेश करना है। लेखक ने यह बताया है कि प्राचीन भारतीय स्थापत्य में धर्म और दर्शन का गहरा संबंध है, और यह भारतीय संस्कृति की एक महत्वपूर्ण पहचान है। पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि वास्तु का निर्माण केवल भौतिक दृष्टिकोण से नहीं बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी किया जाना चाहिए। हिन्दू प्रासाद की रचना में धार्मिक आस्था, परंपरा और पुराणों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। लेखक ने यह स्पष्ट किया है कि भारतीय वास्तु केवल एक भौतिक संरचना नहीं है, बल्कि यह एक अलौकिक और आध्यात्मिक तत्वों का समावेश करता है। प्रासाद की रचना में मानव कौशल और कला की पराकाष्ठा देखने को मिलती है, जो मानवता और देवत्व के संबंधों को दर्शाती है। अंततः, पाठ भारतीय स्थापत्य और वास्तु-शास्त्र की गहराई, उसकी सांस्कृतिक और धार्मिक महत्ता को समझाने का प्रयास करता है, जिससे यह दर्शाया जा सके कि यह सिर्फ एक कला नहीं, बल्कि एक गहन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है।


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