भारतेन्दु ग्रंथवाली (तीसरा खंड) | Bhartendu Granthavali( Khand- 3)

By: ब्रजरत्न दास - Brajratna Das
भारतेन्दु ग्रंथवाली (तीसरा खंड) | Bhartendu Granthavali( Khand- 3) by


दो शब्द :

इस पाठ में भारतीय साहित्यकार भारतेंदु हरिश्चंद्र की जीवनी और उनकी रचनाओं के प्रकाशन के प्रयासों का विवरण दिया गया है। पाठ में उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं, उनके परिवार, शिक्षा और साहित्यिक योगदान पर चर्चा की गई है। भारतेंदु जी का जन्म 1860 में काशी में हुआ था और उनका निधन 1887 में हुआ। उनके साहित्यिक कार्यों को समर्पित ग्रंथों के प्रकाशन के लिए काशी नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा प्रयास किए गए। उनके कार्यों में कविता, नाटक और अन्य रचनाएँ शामिल थीं। भारतेंदु जी की रचनाएँ हिंदी साहित्य के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं और उनका योगदान आज भी साहित्य प्रेमियों के लिए प्रेरणादायक है। पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि उनकी पत्नी सूर्यकुमारी जी ने उनके कार्यों को संकलित करने और प्रकाशित कराने की इच्छा व्यक्त की थी। इसके लिए उन्होंने एक अचल निधि की व्यवस्था की थी, जिससे हिंदी साहित्य को लाभ हो सके। पाठ के अंत में यह चिंता व्यक्त की गई है कि हिंदी साहित्य की रचनाएँ सुरक्षित नहीं हैं और उनके संरक्षण की आवश्यकता है। कुल मिलाकर, यह पाठ भारतेंदु हरिश्चंद्र की साहित्यिक यात्रा, उनके परिवार की भूमिका और हिंदी साहित्य के विकास में उनके योगदान को उजागर करता है।


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