शव साधन | Shav Sadhan

- श्रेणी: Magic and Tantra mantra | जादू और तंत्र मंत्र
- लेखक: बलदेवप्रसाद मिश्र - Baladevprasad Mishr
- पृष्ठ : 218
- साइज: 5 MB
- वर्ष: 1947
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दो शब्द :
पाठ में कश्मीर के माहौल और वहां के विद्वानों, कवियों और संगीत के महत्व का वर्णन किया गया है। राजा जयापीड़ के शासनकाल में कश्मीर एक विद्या और कला का केंद्र बन गया था। राजा की विद्या और कला के प्रति रुचि थी, और वह देशाटन पर जाने का निर्णय लेते हैं। महामंत्री उनके यात्रा के खतरों के बारे में चेताते हैं, लेकिन राजा अपने अनुभवों को प्राप्त करने की इच्छा से अडिग रहते हैं। राजा की यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों और व्यक्तियों का उल्लेख किया गया है, जिसमें तान्त्रिकों और गणिकाओं का महत्व भी है। राजा जयापीड़ की यात्रा और उसके अनुभवों के माध्यम से समाज के विभिन्न पहलुओं को उजागर किया गया है। राजा का संगीत और नृत्य के प्रति प्रेम और उसकी गहराई को भी दर्शाया गया है। कथा में कमलछा नामक एक गणिका का विशेष उल्लेख है, जो राजा के प्रति आकर्षित होती है। उसकी नृत्य कला और राजा के प्रति भावनाओं का चित्रण पाठ को और भी गहरा बनाता है। इस प्रकार, यह पाठ कश्मीर की सांस्कृतिक विरासत, कला, और मानव संबंधों की जटिलताओं को उजागर करता है।
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