इस्लाम का जन्म तथा प्रचार | Islam ka Janm Tatha Prachar

By: अज्ञात - Unknown
इस्लाम का जन्म तथा प्रचार | Islam ka Janm Tatha Prachar by


दो शब्द :

इस्लाम का उदय और प्रसार एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना है। इसकी शुरुआत पैगंबर मुहम्मद के माध्यम से हुई, जिन्होंने अपने धर्म के प्रचार में कठोर परिश्रम किया। मदीना में उनकी शक्ति बढ़ी और उन्होंने 630 ईस्वी में मक्का पर कब्जा किया। उन्होंने मक्का के निवासियों को माफ कर दिया और उन्हें एकेश्वरवाद की ओर आमंत्रित किया। उनके अनुयायियों की संख्या तेजी से बढ़ी, और उन्होंने अपने जीवन के अंतिम दिनों तक उपदेश देना जारी रखा। मुहम्मद साहब के सिद्धांत सरल थे, जिसमें एक ही ईश्वर अल्लाह की पूजा और मुहम्मद को उसका अंतिम पैगंबर मानना शामिल था। उन्होंने मुसलमानों के लिए पांच मुख्य कर्तव्यों का पालन करने का निर्देश दिया, जिसमें कलमा, नमाज, जकात, रमजान का उपवास, और हज शामिल हैं। उनकी मृत्यु 632 ईस्वी में हुई, जो उनके अनुयायियों के लिए एक बड़ा सदमा था। उनके उत्तराधिकार का मुद्दा विवाद का कारण बना, क्योंकि उन्होंने किसी उत्तराधिकारी की घोषणा नहीं की थी। अंततः अबू बक्र को खलीफा चुना गया। इसके बाद उमर और उसमान खलीफा बने। इस्लाम में विभिन्न सम्प्रदाय हैं, जिनमें सुन्नी और शिया प्रमुख हैं। सुन्नी पहले चार खलीफाओं को मानते हैं, जबकि शिया का मानना है कि केवल अली ही सही उत्तराधिकारी थे। खिलाफत की राजनीतिक स्थिति में बदलाव आया, और मुआविया ने उमैयाद खलीफाओं की स्थापना की, जिसके बाद राजनीतिक शक्ति अरब के अभिजात वर्ग के हाथ में चली गई। इस प्रकार, इस्लाम का विकास और उसकी राजनीतिक संरचना समय के साथ बदलती रही, जो धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से प्रभावित हुई।


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