राज सन्यासी | Raj Sanyasi

- श्रेणी: उपन्यास / Upnyas-Novel साहित्य / Literature
- लेखक: चंद्र-मोहन - Chandra Mohan रवीन्द्रनाथ टैगोर - Ravindranath Tagore
- पृष्ठ : 136
- साइज: 3 MB
- वर्ष: 1910
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दो शब्द :
इस पाठ में राजा और बच्चों के बीच की एक सरल और मासूम बातचीत का वर्णन किया गया है। राजा, जो एक दयालु व्यक्ति है, बच्चों के साथ समय बिताना पसंद करता है। वह एक छोटी लड़की और उसके भाई के साथ मिलकर खेलता है और उन्हें फल तोड़कर देता है। बच्चे, विशेषकर 'ताता' नाम का एक छोटा लड़का, अपनी बहन 'हासी' के साथ मिलकर राजा से बातचीत करते हैं। हासी और ताता के बीच की मासूमियत और उनके अजीब उच्चारण पाठ को रोचक बनाते हैं। कहानी में एक गंभीर मोड़ तब आता है जब हासी राजा से पूछती है कि नदी में बहने वाला खून किसका है। राजा, जो पहले इस पर विचार नहीं करते थे, अब इस प्रश्न पर चिंतन करने लगते हैं। यह सवाल राजा के मन में एक गहरी सोच पैदा करता है और उन्हें यह एहसास कराता है कि इतनी बलि और खून का उद्देश्य क्या है। कहानी में बच्चों की मासूमियत और राजा की दयालुता के बीच संतुलन स्थापित किया गया है। पाठ में बच्चों की बातों में एक सरलता है जो पाठक को सोचने पर मजबूर करती है। अंततः, यह कहानी न केवल बच्चों की मासूमियत का चित्रण करती है, बल्कि मानव मन में करुणा और नैतिकता के प्रति जागरूकता भी लाती है।
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