भारतीय संस्कृति और साधना खंड-२ | Bharatiya Sanskriti Aur Sadhana Vol -2
- श्रेणी: Cultural Studies | सभ्यता और संस्कृति भारत / India
- लेखक: महामहोपाध्याय श्री गोपीनाथ कविराज - Mahamahopadhyaya Shri Gopinath Kaviraj
- पृष्ठ : 363
- साइज: 15 MB
-
-
Share Now:
दो शब्द :
यह पाठ "भारतीय संस्कृति और साधना" नामक ग्रंथ के द्वितीय खंड का सारांश प्रस्तुत करता है। इस खंड में डॉ. श्रीगोपीनाथ कविराज के 21 निबंध शामिल हैं, जिनकी रचना 1923 से 1956 के बीच की गई थी। ये लेख भारतीय संस्कृति और साधना के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हैं और पाठकों को कविराजजी के ज्ञान और अनुभवों से परिचित कराते हैं। लेखों का विषय विविध है, लेकिन सभी लेख भारतीय संस्कृति और साधना के सूत्र में अनुबंधित हैं। इनमें से कई लेख पहले प्रकाशित हो चुके हैं और ये पूर्व के लेखों को पूर्णता प्रदान करते हैं। ग्रंथ में सेवा के आदर्श, योग, भक्ति, और विभिन्न साधनाओं का विवेचन किया गया है। सेवा का महत्व बताते हुए यह कहा गया है कि सेवा का वास्तविक उद्देश्य दूसरों के दुःख को दूर करना और वास्तविक सुख की प्राप्ति करना है। ग्रंथ में सेवा के विभिन्न प्रकारों का वर्णन किया गया है, जैसे व्यक्तिगत सेवा और समाज सेवा। यह भी बताया गया है कि सेवा का उद्देश्य न केवल अन्य लोगों की भलाई करना है, बल्कि स्वयं की आत्मिक उन्नति के लिए भी है। इस प्रकार, यह ग्रंथ साधना और संस्कृति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान प्रस्तुत करता है और पाठकों को गहन विचार करने के लिए प्रेरित करता है। डॉ. कविराज के विचारों को संरक्षित करने के लिए बिहार-राष्ट्रभाषा परिषद् द्वारा इस ग्रंथ का प्रकाशन किया गया, जिसे उच्च सम्मान प्राप्त है। यह ग्रंथ भारतीय संस्कृति और साधना के प्रति पाठकों की समझ को विस्तृत करने का कार्य करेगा।
Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.