वनौषधि-चंद्रोदय (तीसरा भाग) | Vanoshadhi-chandrodya ( part-3)

By: चन्द्रराज भंडारी विशारद - Chandraraj Bhandari Visharad


दो शब्द :

इस पाठ में विभिन्न वनस्पतियों और उनके गुणों, दोषों तथा उपयोगों का विवरण दिया गया है। पाठ में वर्णित वनस्पतियाँ विभिन्न प्रकार की औषधीय गुणों को धारण करती हैं, जैसे कि ज्वर निवारक, पेट के रोगों में राहत देने वाली, सूजन कम करने वाली आदि। पाठ में 'वनोषधि-चन्द्रोदय' नामक पुस्तक के तीसरे भाग का उल्लेख है, जिसमें विभिन्न औषधियों का वर्णन किया गया है। इनमें से कुछ प्रमुख वनस्पतियों के नाम और उनके गुणों की चर्चा की गई है, जैसे कि कोकीन, खजूर, गंडलिया, और गदम्बल। प्रत्येक वनस्पति के लिए उसके गुण, उपयोग और प्रभाव का उल्लेख किया गया है। उदाहरण के लिए, गंडलिया का उपयोग सूजन, बवासीर और दर्द के उपचार के लिए किया जाता है। इसी प्रकार, गदम्बल का उपयोग जहरीले काटने के इलाज में किया जाता है। पाठ में औषधियों के सेवन के लिए उचित मात्रा और उनके मिश्रण का भी ध्यान रखा गया है, जिससे उनकी प्रभावशीलता बढ़ती है। इस प्रकार, यह पाठ औषधीय वनस्पतियों की विस्तृत जानकारी प्रदान करता है, जो पारंपरिक चिकित्सा में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं।


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