कनुप्रिया | Kanupriya

By: धर्मवीर भारती - Dharmvir Bharati
कनुप्रिया | Kanupriya by


दो शब्द :

इस पाठ में राधा और कृष्ण के प्रेम को एक अद्भुत और गहन रूप में प्रस्तुत किया गया है। लेखक धर्मवीर भारती ने इस प्रेम कथा को पौराणिक संदर्भों में आधुनिक दृष्टिकोण से देखा है। यह कविता संग्रह 'कनुप्रिया' के विभिन्न गीतों के माध्यम से राधा की भावनाओं, उसकी आकांक्षाओं और उसके मन की गहराइयों का चित्रण किया गया है। कविताएं राधा के प्रेम में उसकी लज्जा, संकोच और तन्मयता के क्षणों को उजागर करती हैं। राधा अपने प्रेमी कृष्ण के प्रति अपने भावनात्मक संघर्ष और संबंध की जटिलताओं को व्यक्त करती है। वह अपने प्रेम को विभिन्न रूपों में अनुभव करती है—कभी अपने भीतर की गहराई में डूबकर, कभी बाहरी दुनिया से हटकर, और कभी उसकी आत्मा की गहराइयों में। कविताओं में राधा की यह आकांक्षा भी दिखाई देती है कि वह कृष्ण के साथ अपने प्रेम को पूरी तरह जी सके। राधा के प्रेम में न केवल आनंद है, बल्कि एक अदृश्य भय और संकोच भी है। वह अपने प्रेम के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में संकोच करती है, लेकिन साथ ही अपने प्रेम को पहचानने और उसे जीने के क्षणों का अनुभव भी करती है। इस प्रकार, यह पाठ राधा-कृष्ण के प्रेम की गहराई, उसकी जटिलताओं और उसके ताजगी भरे अनुभवों को चित्रित करता है, जो न केवल पौराणिक हैं बल्कि आधुनिक युग में भी प्रासंगिक हैं। भारती ने राधा की दृष्टि से कृष्ण की महिमा, उनकी लीलाओं और उनके साथ राधा के संबंधों को एक नई रोशनी में प्रस्तुत किया है।


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