गायत्री- मंत्र भाष्य | Gaytri- Mantra Bhashya

By: स्वामी नीलकंठानन्द सरस्वती - Swami Neelkanth Nanda Saraswati


दो शब्द :

इस पाठ में गायत्री मंत्र और उसके महत्व पर चर्चा की गई है। यह पाठ स्वामी नीलकण्ठानन्द सरस्वती द्वारा लिखा गया है, जिसमें उन्होंने गायत्री मंत्र के संस्कृत भाष्य का हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है। स्वामी जी ने गायत्री मंत्र की महत्ता को समझाते हुए कहा है कि यह मंत्र सभी वेदों का सार है और इसे जपने से व्यक्ति की बुद्धि को प्रेरणा मिलती है। स्वामी जी ने इस मंत्र के जप और प्राणायाम की विधियों को समझाया है और यह बताया है कि यह सभी जातियों के लिए आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा है कि गायत्री मंत्र का जप करने से व्यक्ति की आत्मा को शांति और ज्ञान की प्राप्ति होती है। यह मंत्र सर्वशक्तिमान परमात्मा की उपासना का एक महत्वपूर्ण साधन है जो ज्ञान और प्रकाश का स्रोत है। इस पाठ में गायत्री मंत्र के विभिन्न अर्थों और उसके तत्वों की भी व्याख्या की गई है। अंत में, लेखक ने स्वामी जी की प्रेरणा और सहायता के लिए धन्यवाद किया है और आशा व्यक्त की है कि पाठक इस अनुवाद से लाभान्वित होंगे।


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