चौहान कुल-कल्पद्रुम | Chauhan Kul -Kalpadrum

- श्रेणी: इतिहास / History
- लेखक: लालुभाई भीमभाई देसाई - Lallubhai Bhimbhai Desai
- पृष्ठ : 704
- साइज: 29 MB
- वर्ष: 1927
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दो शब्द :
इस पाठ में राजपूतों, विशेषकर चोहानों की वंशावली और इतिहास का उल्लेख किया गया है। चोहानों की विभिन्न शाखाओं का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि उनकी प्राचीन शाखाओं की पहचान करना मुश्किल हो गया है। राजपूतों की शाखाएँ अक्सर अपने पूर्वज के नाम से जानी जाती हैं, जिसमें 'ओत' या 'वत्त' जैसे शब्दों का प्रयोग होता है। पाठ में यह भी बताया गया है कि चोहानों की दस शाखाएँ सांभर से निकलने वाली मानी जाती हैं, जिनमें सांभरिया, मोहील, पूिया, भदोरिया, पंजाबी, मामा, चांदाणा, बगढावत और नाडोछ शामिल हैं। हालांकि, ऐतिहासिक स्रोतों में इन शाखाओं के नामों में भिन्नता पाई जाती है। पाठ में चोहानों के प्रसिद्ध व्यक्तित्वों, जैसे पृथ्वीराज चौहान और उनके वंशजों का भी उल्लेख है। यह बताया गया है कि पृथ्वीराज के वंशजों ने रणथंभोर में अपना राज्य स्थापित किया, लेकिन वर्तमान में उनकी संतानें कहाँ हैं, इसका स्पष्ट कोई प्रमाण नहीं है। राजपूतों की पहचान और उनके lineage के बारे में जानकारी भाटों के चोपड़ों पर आधारित है, जो उनके इतिहास को प्रमाणित करने में महत्वपूर्ण माने जाते हैं। पाठ में यह भी बताया गया है कि राजपूतों के बारे में लिखी गई ऐतिहासिक कृतियों में कई विवाद और भिन्नताएँ हैं, जो उनके वंश और उनके इतिहास की सत्यता पर सवाल उठाती हैं। अंत में, पाठ में चोहानों के वीरता और उनकी लड़ाइयों का उल्लेख किया गया है, जिसमें हमीर हठीला का नाम प्रमुखता से लिया गया है, जो अलाउद्दीन खिलजी के साथ युद्ध में प्रसिद्ध हैं। इस प्रकार, पाठ में राजपूतों की पहचान, उनके वंश, और ऐतिहासिक घटनाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है।
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