हिन्दी-प्रदीप मासिक पत्र | Hindi -Pradeep masik Patra

By: पंडित बालकृष्ण भट्ट - Pandit Balakrishna Bhatt
हिन्दी-प्रदीप मासिक पत्र | Hindi -Pradeep masik Patra by


दो शब्द :

इस पाठ में कानून और न्याय व्यवस्था पर विचार किया गया है। लेखक यह दर्शाता है कि भारतीय न्याय प्रणाली और कानूनों का निर्माण विदेशी प्रभावों के तहत हुआ है, जिससे हमारी पारंपरिक न्याय व्यवस्था का स्वरूप बिगड़ गया है। लेखक यह भी बताता है कि आधुनिक वकील और न्यायाधीश, जो अंग्रेजी कानून के साथ बड़े हुए हैं, ने भारतीय कानूनी परंपराओं को कमजोर किया है। कानूनों की तकनीकीता और पेचिदगी ने आम जनता के लिए न्याय प्राप्त करना कठिन बना दिया है। इसके अलावा, लेखक ने सचाई और ईमानदारी के महत्व पर बल दिया है। वह यह बताता है कि समाज में सचाई और ईमानदारी की बहुत अधिक आवश्यकता है, ताकि लोग एक-दूसरे के चरित्र का सम्मान कर सकें। संतुलित और ईमानदार व्यवहार से ही समाज में समर्पण और विश्वास की भावना बढ़ती है। लेखक ने यह भी उल्लेख किया है कि वेदांत और धार्मिक शिक्षा का अत्यधिक दुरुपयोग हुआ है, जिससे लोग सत्य को समझने और आचरण में लाने में असफल हो रहे हैं। इस प्रकार, वेदांत को सही संदर्भ में समझना और लागू करना आवश्यक है, ताकि समाज में वास्तविक सुधार हो सके। अंत में, लेखक ने यह स्पष्ट किया है कि समाज में सचाई और गरिमा का होना अनिवार्य है, जिससे सभी व्यक्तियों का मूल्य और सम्मान बना रहे।


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