भागो नहीं दुनिया को बदलो | Bhago Nahin Duniya ko Badalo

- श्रेणी: उपन्यास / Upnyas-Novel
- लेखक: राहुल सांकृत्यायन - Rahul Sankrityayan
- पृष्ठ : 378
- साइज: 24 MB
- वर्ष: 1944
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दो शब्द :
इस पाठ में लेखक ने एक किताब लिखने के अपने अनुभव को साझा किया है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने इस किताब की लेखनी शुरू की, तो उन्हें अपनी मातृभाषा में लिखने में कठिनाई महसूस हुई, लेकिन उन्होंने इसे चुनौतियों के बावजूद आगे बढ़ाया। लेखक ने यह भी उल्लेख किया कि उन्होंने अपने विचारों को सरल और आम जनता तक पहुँचाने के लिए एक सामान्य भाषा का प्रयोग किया। लेखक ने अपने लेखन में अपने ग्रामीण अनुभवों और स्थानीय भाषाओं से प्रेरणा ली है। उन्होंने अपने सहयोगियों की भी सराहना की, जिन्होंने उनके लेखन में मदद की। पाठ में सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर भी ध्यान दिया गया है, जहाँ लेखक ने समाज में चल रही विषमताओं और गरीबों की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीतिक प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे जनता के कल्याण के लिए काम करें। लेखक ने यह भी बताया कि देश में गरीबी एक गंभीर समस्या है और इसे दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि केवल वोट देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि लोगों को अपनी स्थिति और भलाई के बारे में जागरूक होना चाहिए। पाठ के अंत में, लेखक ने यह दर्शाया कि आजादी के बाद समाज में काफी परिवर्तन आया है, लेकिन गरीबी और अन्याय अभी भी विद्यमान हैं। उन्होंने अपने पाठकों को यह संदेश दिया कि सामूहिक प्रयासों के बिना सुधार संभव नहीं है और हर व्यक्ति को अपने हिस्से का योगदान देना होगा। इस प्रकार, लेखक ने अपनी किताब के माध्यम से समाज की समस्याओं को उजागर किया है और बेहतर भविष्य के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया है।
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