अनुसन्धान का स्वरुप | Anusandhan Ka Swaroop

By: डॉ. सावित्री सिन्हा - Dr. savitri sinha
अनुसन्धान का स्वरुप | Anusandhan Ka Swaroop by


दो शब्द :

इस पाठ में हिन्दी अनुसंधान परिषद् की स्थापना, उसके उद्देश्यों और उसके द्वारा प्रकाशित ग्रंथों के बारे में जानकारी दी गई है। यह परिषद् हिन्दी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही है। परिषद् ने विभिन्न विषयों पर ग्रंथों का प्रकाशन किया है, जिनमें "हिन्दी काव्यालंकारसूत्र" और "सध्यकालीन हिन्दी कवयित्रियाँ" पहले से प्रकाशित हो चुके हैं। पाठ में यह भी बताया गया है कि अनुसंधान के सिद्धांतों और उनके स्वरूप पर विचार करने की आवश्यकता है। इसके तहत, इतिहास के अध्ययन की प्रकृति पर चर्चा की गई है। लेखक ने इतिहास को केवल घटनाओं की सूची के रूप में सीमित नहीं माना, बल्कि घटनाओं के बीच संबंधों और संघर्षों का अध्ययन करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। लेखक ने स्पष्ट किया है कि इतिहासकार का कार्य मात्र घटनाओं का विवरण नहीं है, बल्कि उनके कारणों और प्रभावों का गहन अध्ययन करना है। इसके लिए शोधक को सामग्री एकत्रित करनी होती है, घटनाओं के क्रम को समझना होता है और अंत में निबंध लिखने की कला का प्रयोग करना होता है। इस प्रकार, पाठ में अनुसंधान के प्रक्रिया, उद्देश्य और उसकी विधियों पर गहन विचार किया गया है, जो हिन्दी अनुसंधान परिषद् के कार्यों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।


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