इतिहास की अमर बेल ओसवाल | Itihas Ki Amar Bail Oswal

- श्रेणी: इतिहास / History
- लेखक: मांगीलाल भुतोरिया - Mangilal Bhutoria रघुवीर सिंह - Dr Raghuveer Singh
- पृष्ठ : 444
- साइज: 21 MB
- वर्ष: 1977
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दो शब्द :
इस पाठ में मांगीलाल भूतोड़िया द्वारा लिखित "इतिहास की अमर बेल: ओसवाल" नामक पुस्तक का सार प्रस्तुत किया गया है। लेखक ने जैन धर्म और ओसवाल जाति के संबंध में एक व्यापक ऐतिहासिक विवेचन किया है। उन्होंने बताया है कि भारत एक धर्म प्रधान देश है, जहां जब भी धर्म का क्षय हुआ है, तब धर्म के पुनर्निर्माण के लिए महान व्यक्तियों का उदय हुआ। जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों में से ऋषभदेव पहले और महावीर स्वामी अंतिम थे। इसके अलावा, उन्होंने जैन धर्म की प्राचीनता, उसके अनुयायियों की संख्या, और विभिन्न सम्प्रदायों (जैसे दिगम्बर और श्वेताम्बर) के बीच के भेद का भी उल्लेख किया है। लेखक ने ओसवाल जाति की उत्पत्ति, उनके सामाजिक समीकरण, और जैन आचार्यों के योगदान पर भी प्रकाश डाला है। ओसवाल जाति की स्थापना जोधपुर के निकट ओसिया नगरी से हुई मानी जाती है। उनके इतिहास में कई महत्वपूर्ण व्यक्तियों का योगदान रहा है, जिन्होंने राजनीति, धर्म, और समाज में अपनी पहचान बनाई। इस ग्रंथ के माध्यम से मांगीलाल भूतोड़िया ने ओसवाल जाति के इतिहास का विस्तृत संग्रह प्रस्तुत किया है, जिससे भविष्य में इस विषय पर और अधिक अध्ययन संभव हो सकेगा। लेखक ने विभिन्न स्रोतों का उपयोग करते हुए ओसवालों के गोत्रों, उनके सामाजिक कार्यों, और धार्मिक परंपराओं का विवेचन किया है। यह ग्रंथ न केवल पठनीय है, बल्कि अध्ययन और संग्रहणीय भी है, और भारतीय इतिहास के एक महत्वपूर्ण हिस्से का प्रामाणिक विवेचन प्रस्तुत करता है।
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