यज्ञ | Yagya by


दो शब्द :

इस पाठ में कालीपट्नम रामाराव की कथाओं का विश्लेषण किया गया है, विशेष रूप से उनकी कहानी "यज्ञम" और "आर्ति" का। लेखक ने रामाराव को एक प्रतिभाशाली कहानीकार के रूप में प्रस्तुत किया है, जिन्होंने तेलुगु कथा साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनकी कहानियाँ मानवीय भावनाओं को उजागर करती हैं और सामाजिक मुद्दों पर प्रकाश डालती हैं। "यज्ञम" कहानी में सोने से बनी उग्र काली माता की प्रतिमा का उल्लेख किया गया है, जो दर्शाती है कि सोने की वस्तुएँ भी विभिन्न रूपों में अर्थ रख सकती हैं। रामाराव ने अपनी कहानियों के माध्यम से आम आदमी के संघर्ष और सामाजिक अन्याय को चित्रित किया है। पाठ में सुंदरपालेम नामक गाँव का भी वर्णन मिलता है, जहाँ गाँव के लोग अपने दैनिक जीवन में विभिन्न गतिविधियों में लगे रहते हैं। पंचायत की बैठक के संदर्भ में एक झगड़े का जिक्र किया गया है, जो गाँव के सामाजिक ताने-बाने को दर्शाता है। कुल मिलाकर, यह पाठ रामाराव की कहानियों की विशेषताओं, उनके प्रभाव और गाँव के जीवन का यथार्थ चित्रण करता है, जो पाठकों को सोचने पर मजबूर करता है।


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