स्वर्ण जयंती -ग्रन्थ | Swarna Jayanti -Granth

- श्रेणी: भारत / India साहित्य / Literature
- लेखक: श्री शा. रा. शारंगपाणि - Shri Sha. Ra. Sharangpani
- पृष्ठ : 380
- साइज: 10 MB
- वर्ष: 1970
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दो शब्द :
दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा, मद्रास द्वारा प्रकाशित "स्वर्णजयंती ग्रंथ" दक्षिण भारत में हिन्दी के प्रचार, शिक्षण और संगठन के कार्यों का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इस ग्रंथ में हिन्दी आंदोलन के विकास, उपलब्धियों और सांस्कृतिक नवजागरण का सार प्रस्तुत किया गया है। सभा ने इस अवसर पर अपने पिछले कार्यों का मूल्यांकन करने और भविष्य की दिशा तय करने के लिए यह स्मारिका प्रकाशित करने का निर्णय लिया। ग्रंथ में तीन मुख्य खंड हैं: भाषा और साहित्य, संस्कृति और कला, और इतिहास। प्रत्येक खंड में दक्षिण भारत में हिन्दी की स्थिति, उसके विकास और सांस्कृतिक योगदान पर चर्चा की गई है। लेखकों ने अपने विचार प्रस्तुत किए हैं, जो सभा के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते, बल्कि उनके व्यक्तिगत दृष्टिकोण हैं। इस ग्रंथ में हिन्दी लेखकों की मेहनत और उनके योगदान को मान्यता देने का प्रयास किया गया है। लेखक यह भी बताते हैं कि विभिन्न प्रादेशिक भाषाओं की विशेषताएँ और उनके साहित्य का हिन्दी पर प्रभाव रहा है। सभा का उद्देश्य है कि हिन्दी को एक सांस्कृतिक भाषा के रूप में स्थापित किया जाए और इसके माध्यम से देश की एकता को बढ़ावा दिया जाए। इस प्रकार, यह ग्रंथ हिन्दी आंदोलन के इतिहास, उसकी उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं का एक समृद्ध स्रोत बनता है, जो पाठकों को दक्षिण भारत में हिन्दी के महत्व और विकास के बारे में जानकारी प्रदान करता है।
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